“कुछ दाग अच्छे हैं”

“कुछ दाग अच्छे हैं”
माहवारी, रजोदर्शन, रजोधर्म, मासिक धर्म या पीरियड नाम सुनते ही आज भी लड़कियां खामोश हो जाती हैं। वे खुलकर बात नही कर पाती ,क्योंकि जिस दिन से मासिक धर्म की शुरुआत होती है उसी दिन से उसे सिखाया जाता है तुम बीमार हो, अशुद्ध हो, पूजा घर मे मत जाना, इसके हाथ मत लगाना, उसे मत छूना, ये करना, ये मत करना। वो बेचारी इसी पशोपेश में पड़ जाती है कि क्या मुझसे कोई गुनाह हो गया है? आज हम भले ही वैज्ञानिक युग मे जी रहें हैं, लेकिन मासिक धर्म के प्रति दृष्टिकोण में अभी कोई ज्यादा अंतर नही आ पाया। शहरों में एकल परिवार की वजह से खाना तो बना लेती हैं महिलाएं पर पूजा पाठ, मंदिर, व्रत आदि से परहेज किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और भी बदतर हैं । अभी कल ही एक बालिका मेरे पास आई मेम घर जाना है। मेरी तबियत ठीक नही। मेरे कपड़ों पर दाग भी लग गया बहुत शर्म आ रही है। इसमे शर्म जैसी कोई बात नही, ” ये दाग अच्छे हैं” ये तुम्हारी सृजन शक्ति का प्रतीक हैं। इसी मे तुम्हारे नारीत्व की सम्पूर्णता है। ये शर्म की नही गर्व की बात है। मासिक धर्म शुरू होने से पहले ही यदि एक बालिका को इस दौरान बरती जाने वाली स्वच्छता एवं सावधानियों के बारे में जानकारी दे दी जाए तो बालिकाएं इस पर खुलकर बात कर सकेंगी।

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क्या करें?
“एक माँ”
1 बेटी को समझाए कि ये एक जैविक प्रक्रिया है। प्रत्येक स्त्री को इस दौर से गुजरना पड़ता है।
2 12 से 14 साल तक की प्रत्येक बालिका को माहवारी आ जानी चाहिए। यदि ऐसा न हो तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
3  अमूमन माहवारी का चक्र 22 से 28 दिन या कभी कभी 30 से 32 दिन भी होता है और 4 से 5 दिन तक स्राव स्वतः ही रुक जाता है। इसका अनियमित होना भी परेशानी का सबब है।
4 अपनी बच्ची को आम दिनों की तरह ही सभी कार्य करने दे, विद्यालय जाने से भी न रोकें।
5 सम्पूर्ण पौष्टिक आहार व आराम करने का मौका दे।
6 दुसरो के सामने उसे माहवारी को लेकर हीन भावना न महसूस करवाएं।
7 सैनेटरी पेड का ही उपयोग व निस्तारण भी सिखाएं कि न तो कोई जानवर खा पाये और न ही पर्यावरण प्रदूषित हो।

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“एक शिक्षिका” एक शिक्षिका को चाहिए कि उसे अच्छी  तरह से काउंसिल करे उसे बताये…
1  एक महिला को तकरीबन अपने सम्पूर्ण जीवन मे 450 बार या 37 से 38 साल मासिक धर्म होता है।
2  यदि इस दौरान कमर दर्द, पेड़ू दर्द, पेट दर्द हो तो गर्म पानी की सिकाई आराम देती है, इन 5 दिनों में नहाना भी गर्म पानी से चाहिए।
3  हमारे गर्भाश्य की पुरानी ऊतकों तथा योनि के स्राव और रक्त के इस मिश्रण से ही एक मानव शरीर का निर्माण होता है। जब ये काम नही आता तो शरीर इसे बाहर निकाल देता है। ये प्रक्रिया चलती रहती है। जिस तरह से हमारे शरीर से पसीना निकलता है वैसे ही ये भी।
4 इन दिनों में पूजा पाठ करने से, व्रत से ईश्वर नाराज नही होते, अशुद्ध भी नही होते क्योकि वे तो सर्वोपरि है। और उसी रक्त से जब हमारा शरीर भी बना है।
5 विद्यालय में इंसीनरेटर/ डिस्पेंसर मशीन का उपयोग करना सिखाये।
6 हर महीने एक कार्यशाला का आयोजन कर बलिकाओं को जागरूक करती रहें।

“एक बालिका”

1  बालिका को चाहिए कि वो माहवारी में आने वाली हर परेशानी को घर पर अपनी माता या बहन से साझा करें, विद्यालय में शिक्षिका से। माहवारी की अनियमितता उनकी प्रजनन शक्ति पर प्रभाव डाल सकती है।
2  नियमित योगा व व्यायाम करती रहें।
3 आम दिनों की तरह कार्य करें, रूढ़िवादी परंपराओं से परिवार व पास – पड़ौस को जागरूक करें।
4 प्रसन्न रहें।
5 विद्यालय आना न छोड़ें।
6 महावारी से शर्म नही, बल्कि महावारी का उत्सव मनाएं।
“आओ माहवारीका उत्सव मनाएं” जिस से नारी सम्पूर्ण कहलाये। तो हर दाग बुरा नही होता। ये दाग हमारे सम्मान का प्रतीक है।” नारीत्व की सम्पूर्णता का प्रतीक मासिक धर्म ही है। इसलिए हमें इस पर शर्म नही गर्व करना चाहिए।

शोभा कँवर
बालिका गरिमा पुरस्कार से सम्मानित
अध्यापिका-राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बरुन्धन, बून्दी, राजस्थान


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