मंच पर जीवंत हुआ भोलाराम का जीव-सरकारी दफ्तर की लेटलतीफी

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प्रेस विज्ञप्ति

  • सरकारी दफ्तर की लेटलतीफी को प्रस्तुति

  • मंच पर जीवंत हुआ भोलाराम का जीव

कोटा | 27 मार्च, 2016 रविवार| रंगमंच के आभाव में एक बार फिर रंगकर्मियों को विश्व रंगमंच दिवस सुविधाओं के बिना नाटक कला दीर्घा में करना पड़ा | रंगकर्मी एकता संघ रास की छत्रछाया में कल्पित एक प्रयास और मुक्ता कला केंद्र संस्थान के संयुक्त तत्वाधान में वर्तमान की ज्वलंत परिस्थितियों को मंच पर प्रस्तुत किया गया |

कल्पित एक प्रयास द्वारा आयोजित सात दिवसीय रंगमंचीय कार्यशाला में कोटा के रंगकर्मियों ने उत्साह पूर्वक हिस्सा लिया और इस दौरान नाटक की प्रस्तुति भी तैयार की गई | राघव द्वारा निर्देशित एवं गीत रचित और हरिशंकर परसाई द्वारा लिखित “भोला राम का जीव” नाटक का मंचन किया गया जिसमें सरकारी विभाग में एक आम इंसान की पेंशन में हो रही देरी की दुर्लभ दास्तान प्रस्तुत की गई | नाटक के मुख्य पात्र डॉ. प्रभात कुमार, डॉ. सलीम राज, अमित जैन, निधि प्रजापति, एकता शर्मा, रवि कान्त मिश्रा, राघव, अभिनन्दन गुप्ता, मोहित पाण्डेय, सौरभ, और फैजान रहे | मंच परे चन्दन और राघव द्वारा प्रकाश व्यवस्था संभाली गई |

वही मुक्ता कला केंद्र संस्थान ने मुक्ता कुलश्रेष्ट के द्वारा निर्देशित और मनीष सेन के द्वारा रचित शीला नामक नाटक प्रस्तुत किया जिसमें महिला सशाक्तिकरण पर जोर दिया गया | नाटक में शीला का किरदार निभा रही महिला परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए काम करना चाहती है परन्तु अपने ससुर सुन्दरलाल के विरोध के कारण जो घर में तो संकीर्ण विचारधारा के चलते शीला को काम करने नहीं देना चाहता और घर के बाहर महिलाओं के पक्ष में वकालत करता है अंत में शीला अपने ससुर के द्विपक्षीय व्यव्हार का पर्दाफाश करती है | नाटक के मुख्य किरदार डॉली, मुक्ता कुलश्रेष्ट और श्यामसुंदर रहे |

सादर प्रकाशार्थ प्रेक्षित

सचिव

निधि प्रजापति

8107770920

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