- ईश्वर द्वारा प्रदत्त सृष्टि निर्माण का आशीर्वाद है मासिक धर्म: निधि प्रजापति
- मासिक धर्म अभिश्राप नहीं वरदान : डॉ. पायल उपाध्याय
- ईश्वर ने महिलाओं को हर माह रक्तदान करने की शक्ति प्रदान की है: निधि प्रजापति
- छात्राओं ने ली मासिक धर्म से सम्बंधित भ्रमों को न मानने की शपत |
कोटा | 2 अप्रैल, 2016 | सोसाइटी हैज ईव (शी) एवं वीमेन वेलफेयर आर्गेनाइजेशन ऑफ वर्ल्ड के संयुक्त तत्वाधान में ग्लोबल पब्लिक स्कूल में “ मासिक धर्म एक रक्तक्रांति” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया | कार्यक्रम की शुरआत वीमेन वेलफेयर आर्गेनाइजेशन ऑफ वर्ल्ड की जिला अध्यक्ष डॉ. शिल्पा ने की उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित 150 कक्षा 6 से 10वी की लड़कियों को मासिक धर्म का अर्थ, मासिक धर्मं होने का कारण, इसके लाभ और महीनों के उस समय रखी जाने वाली सावधानियों से अवगत कराया गया | सोसाइटी हैज ईव (शी) की ट्रस्टी और अध्यक्ष निधि प्रजापति ने लड़कियों को बताया की भगवान क्योंकि सम्पूर्ण सृष्टि की संरचना स्वयं नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने नारी की संरचना की और यदि कोई किसी लड़की को मासिक धर्मं न आते हो तो वह लड़की कभी प्राकृतिक रूप से माँ भी नहीं बन सकती | उन्होंने बताया की पृथ्वी में सबसे बड़ा दान रक्तदान माना जाता है क्योंकि वो किसी इंसान की जान बचा सकता है और ईश्वर ने महिलाओं को हर माह रक्तदान करने कि शक्ति इंसान को जन्म देने के लिए प्रदान की है |बालिकाओं को सदैव कॉटन के सनेट्री नेपकिनों का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि बाजार में उपलब्ध काफी अच्छे ब्रांडेड सनेट्री नेपकिनों में भी प्लास्टिक की मात्रा इतनी अधिक मात्रा में होती है की उनके प्रयोग से महिलाओं को लड़कियों को सर्विकल कैंसर, यूट्रस कैंसर जैसी हानिकारक बिमारियाँ हो जाती है | वही वीमेन वेलफेयर आर्गेनाइजेशन ऑफ वर्ल्ड की राज्य अध्यक्ष डॉ. पायल उपाध्याय ने मासिक धर्म को लेकर समाज में फैले भ्रमों पर प्रकाश डालते हुआ कहा की यदि असम की कामाख्या माता को पूजा जा सकता है तो हम क्यों समाज में फैले अतार्किक और व्यर्थ के रीति–रिवाजों का पालन करे | इस दौरान निजी विद्यालय की इन छात्राओं ने सरकारी विद्यालयों में छात्राओं के लिए निशुल्क सनेट्री नेपकिनों के वितरण हेतु हस्ताक्षर भी किये| अंत में विद्यालय प्रिंसिपल सुमति पलीवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया |
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