जीवन बचाना है तो वन बचाना है
वन बचाने है तो बाघ को बचाना है
पारिस्थितिकी संतुलन के लिए वनों का होना अति आवश्यक है
“उस्ताद” को छुड़ाने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान का समापन
कोटा 21 मार्च, 2016 | जंगल को बचाने के लिए और टी-24 उस्ताद नाम के बाघ को उदयपुर के सज्जनगढ़ बयोलोगिकल पार्क से जंगल में पुन: छोड़ने के लिए विश्व वन दिवस पर सिटी मॉल में सोसाइटी हैज ईव शी, यू.टी.आई., और डब्ल्यू. डब्ल्यू.ओ. डब्ल्यू के द्वारा उस्ताद को छुड़ाओं और जंगल बचाओं जागरूकता कार्यक्रम किया गया जिसमे सलाखों में बंद टी-24 “उस्ताद” को छुड़ाने की मांग की गई और लोगों को जंगल में जंगली जानवरों से कैसे व्यवहार करना चाहिए उसके बारे में बताया गया और लोगो से वन बचाने और उस्ताद को छोड़ने के लिए हस्ताक्षर भी कार्य गए | कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात पर्यावरण विद डॉ. एल. के. दाधीच ने सर्वप्रथम अपने हस्ताक्षर कर उस्ताद के जेल में रहने के कारण बताते हुए कहा की यदि जीवन बचाना है तो वन बचाना है और वन बचाना है तो बाघ बचाने होंगे |उन्होंने बताया की जंगल ही एक मात्र स्त्रोत है जिनकी वजह से सृष्टि पर जीवन बचा हुआ है वनों के आभाव में पूरा का पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ जाता है | कार्यक्रम के अध्यक्षता देहरादून के कृषि वानिकी के आचार्य डॉ. वाई के चौधरी और विशिष्ट अतिथि डॉ. अनीता चौधरी और राजस्थान तकनिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विवेक श्रीवास्तव रहे उन्होंने कहा की उस्ताद को निगरानी में रखने का कोई औचित्य नहीं है दोष इंसानों का जिसकी सजा एक बेकसूर जानवर भुगत रहा है |अगर मनुष्य उस्ताद के कार्य क्षेत्र में दखल न देते तो टी-24 उन पर आक्रमण नहीं करता | सोसाइटी हैज ईव शी अध्यक्ष निधि प्रजापति ने बताया की उस्ताद का व्यवहार एक मानवीय स्वभाव का ही उदाहरण है | टाइगर के क्षेत्र में मनुष्यों को प्रवेश ही नहीं करना चाहिए था तथा अब हस्ताक्षर रहित बेनर राज्य वन मंत्री श्री राज कुमार रींवा को रिटायर्ड आई. एफ. एस. एवं पूर्व निदेशक रंथम्बोर व केवलदेव घना पक्षी विहार विजय सालवान जी के नेतृत्व में उस्ताद की रिहाई हेतु भेजे जायेंगे| इस अवसर पर नीतू मेहता, श्वेता, अमित सूद, पायल उपाध्याय, गौरव भटनागर, रीना खण्डेलवाल सहित अनेक पदाधिकारी कार्य कार्यक्रम में उपस्थित रहे | इस अवसर पर वह प्रश्नोतरी का आयोजन भी किया गया |

