निधि प्रजापति अब निधि डॉ निधि प्रजापति को पी.एच.डी. की डिग्री प्रदान की गई.
निधि प्रजापति को पी एच डी डिग्री |
83.63% लोगो का मानना है की कोचिंग का वातावरण बच्चों के तनाव का कारण |
89.09%लोगो का मानना है की कोटा में कोचिंग की बेस्ट फैकल्टी है |
विद्यार्थियों की आत्महत्या करने का प्रमुख कारण व्यक्तिगत है |
11-12 क्लास के विद्यार्थी सबसे अधिक तनाव में रहते है |
कोटा |3 मई 2019| वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय की शोधार्थी और सोसाइटी हेज ईव इन्टरनेशनल ट्रस्ट की ट्रस्टी निधि प्रजापति को असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कीर्ति सिंह के निर्देशन और मार्गदर्शन “ए स्टडी ऑफ स्ट्रेस अमंग कोचिंग स्टूडेन्ट्स इन रिलेशन टू देयर अकेडमिक एण्ड साईकोजेनिक वेरियेबल्स (विद स्पेशल रेफरेन्स टू कोटा सिटी” विषय पर वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय द्वारा पी.एच.डी. की डिग्री प्रदान की गई | इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. भारत सिंह ने कहा की इस विषय पर रिसर्च करना अत्यंत महत्वपूर्ण था क्योंकि अब तक इस विषय पर विस्तृत अध्ययन नहीं किया गया था | हमारे लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है की हमारे विश्वविद्यालय से राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर की समाज सेविका ने इस विषय पर अध्ययन किया और कोटा में कोचिंग के लिए आ रहे बच्चों के तनाव और आत्महत्या को रोकने के लिए सार्थक कार्य किया जो शहर के लिए उपयोगी सिद्ध होगा | अध्ययन के लिए कोटा के 6 बड़े कोचिंग संस्थानों के 385 विद्यार्थियों का चयन किया गया था जो 9, 10, 11, 12 और पास आउट स्तर के थे |
अध्ययन का उद्देश्य: अध्ययन के प्रमुख उद्देश्य कोटा में विभिन्न कोचिंग संस्थानों में अध्यनरत विद्यार्थियों के तनाव के स्तर को उनकी शिक्षा के स्तर, उपलब्धियां, जेंडर, माता पिता का विद्यार्थी के जीवन पर प्रभाव, व्यक्तिगत कारण, कोचिंग और होस्टल वातावरण एवं साथियों आदि का विद्यार्थियों के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना | तनाव और विद्यार्थियों की आत्महत्या के प्रमुख कारणों का अध्ययन करना, विशेष रूप से कोटा में ही आकर कोचिंग करने के कारणों का अध्ययन करना और तनाव को दूर करने के तरीकों के ढूढने और विभिन्न स्तर पर तनाव को दूर करने के लिए सुझाव देना था |
प्रमुख परिणाम: वे विद्यार्थी जिनकी वर्तमान उपलब्धियां पूर्व के रिजल्ट के अनुरूप कम रही वे विद्यार्थी चाहे किसी भी कोचिंग में अध्ययन कर रहे हो वे तनाव झेल रहे है तथा तनाव हर स्तर के विद्यार्थी को है इसमें सबसे ज्यादा तनाव 11वी और 12वी कक्षा विद्यार्थियों को क्योंकि उनके पर 12 बोर्ड के अलावा प्रवेश परीक्षा का भी तनाव रहता है इसके बाद 12 पास कर चुके विद्यार्थियों पर और सबसे कम तनाव 9 वी-10 वी के विद्यार्थियों को रहता है | लड़के और लड़कियों के तनाव में कोई अधिक अंतर नहीं है | कोचिंग विद्यार्थियों के जीवन में तनाव का प्रमुख कारण कोचिंग इंस्टिट्यूट का वातावरण है जिसके बाद, व्यक्तिगत, माता-पिता, साथियों का समूह और होस्टल का वातावरण है | विद्यार्थियों के ऊपर उनके परिवार की आर्थिक स्थिति का भी व्यापक प्रभाव पड़ता है इसके अंतर्गत सबसे महत्वपूर्ण परिणाम ये आया की जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति वार्षिक 10 लाख से ऊपर है वो सबसे ज्यादा तनाव में है तथा जिनकी जिनकी वार्षिक आय ढाई लाख तक की है वे सबसे कम तनाव है |
फोकस ग्रुप और इंटरव्यू के आधार पर विद्यार्थियों के कोटा आकर कोचिंग करने का प्रमुख कारण यहाँ की बेस्ट फैकल्टी, बेस्ट स्टडी मटेरियल, लेटेस्ट टेक्नोलॉजी, माता-पिता का कोटा की कोचिंग्स पर सिलेक्शन देने का विश्वास, विद्यार्थियों में सेलेक्ट होने का विश्वास, कोटा जाकर कोचिंग करने का ट्रेंड (चलन) परिपाठी आदि है | विद्यार्थियों के तनाव और उनके आत्महत्या करने का प्रमुख कारण व्यक्तिगत है जिसके बाद माता-पिता का व्यवहार, कोचिंग का वातावरण, संगी समूह का प्रभाव और होस्टल का वातावरण है | फोकस समूह के अनुसार कैरियर ऑप्शन, दोषयुक्त एजुकेशन सिस्टम और पॉलिसी, विद्यार्थियों के द्वारा अपनी समस्या और भावनाओं को प्रस्तुत न कर पाना व अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति न हो पाना है | एजुकेशन सिस्टम के अंतर्गत विद्यार्थियों का विद्यालय में रेगुलर न होकर डमी होना भी बहुत बड़ा कारण है जिसके कारण बच्चे का ओवर आल डेवलपमेंट रुक जाता है | बच्चे को कोचिंग में सिर्फ मार्क्स और अंकों की सफलता बताई जाती है शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य को पीछे छोड़ कर सिर्फ सफलता का मतलब सिलेक्शन सिखाया जा रहा है |
विद्यार्थी स्तर पर सुझाव: फोकस समूह के द्वारा विद्यार्थी को तनाव से मुक्त करने के लिए भी विभिन्न आधारभूत सुझाव दिए गए जिसमे सबसे महत्वपूर्ण माता पिता द्वारा बच्चों पर किसी विशेष प्रोफेशन को चुनने का दबाव न बनाना, इंडियन एजुकेशन सिस्टम को सुधारना और विद्यार्थियों की मानसिक स्वास्थ्य को सुधारना | तनाव को दूर करने के लिए विद्यार्थी, अभिभावक, कोचिंग और हॉस्टल स्तर पर भी सुधारने के सुझाव दिए है | विद्यार्थियों के स्तर पर योगा, मैडिटेशन, पॉजिटिव थिंकिंग, तनाव को दूर करने के लिए स्वयं का तरीका अपनाना, पर्याप्त आराम और नींद लेना, हॉबी एक्टिविटीज से खुद को रिफ्रेश रखना, अपनी बातें, पॉजिटिव संगीत सुनना, भावनाएं, तनाव, शेयर करना, हेल्दी खाना खाना, अपनी योग्यता और सामर्थ्य के अनुरूप लक्ष्य और करियर का चयन करना और विषय चुनना, रिविजन के लिए निर्धारित समय और तरीका अपनाते हुए टाइम टेबल का अनुसरण करना, सोशल मिडिया से दूर रहना, नियमित रूप से हो रहे टेस्ट में भाग लेना, अनावश्यक किताबों के स्थान पर एन.सी.ई.आर.टी. की बुक्स को पढना, लगातार मिलने वाले फीडबैक को स्वीकार करके उसके अनुरूप अपने अन्दर सुधार करना, पहले की कठिन परिस्थिति में सफलतम क्षणों को याद करना आदि |
माता-पिता के स्तर पर सुझाव:माता-पिता बच्चों को किसी करियर के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए न ही उन्हें किसी भी रिश्तेदार या पडोसी के बच्चे के साथ अपने बच्चे की तुलना करनी चाहिए | अध्ययन के दौरान उन्हें बच्चों के साथ सदैव सकारात्मक व्यवहार बनाना चाहिए एवं समय पर उनकी प्रगति के विषय में बातें करनी चाहिए और मोटीवेट करना चाहिए | उन्हें बच्चों को ये विश्वास दिलाना चाहिए की चाहे परिणाम जो भी रहे में सदैव उनके साथ है | उन्हें बच्चों की बातें की ध्यान से सुननी चाहिए और निर्देश देने के स्थान पर सकारात्मक सुझाव देने चाहिए |
कोचिंग स्तर पर सुझाव: विद्यार्थियों का कोचिंग में अध्ययन के लिए चयन स्क्रीनिंग परीक्षा के द्वारा ही होना चाहिए | सर्टिफाइड और क्वालिफाइड काउंसलर कोचिंग में होने चाहिए, समय समय पर माता-पिता और विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन-मोटिवेशनल कार्यक्रम होने चाहिए | कोचिंग में एक्स्ट्रा कोकरीकुलर एक्टिविटी होनी चाहिए ताकि विद्यार्थियों का ध्यान रचनात्मक दिशा में लग सके | बैच के साइज़ छोटे होने चाहिए ताकि विद्यालयों की तरह कोचिंग में भी विद्यार्थियों के साथ अध्यापकों, फैकल्टी मेंबर्स के बीच प्रभावी सम्बन्ध बन सके | कोचिंग संस्थानों से सीधे तौर से जुड़े होस्टलों की नियमित रूप से जाँच होनी चाहिए | फीस एक साथ न लेकर क्वार्टरली मोड में लेनी चाहिए | मार्क्स कम आने पर बैच बदलने के स्थान पर एक्स्ट्रा क्लास होनी चाहिए |
होस्टल स्तर पर सुझाव: होस्टल वालों को विद्यार्थियों का अतिथि देवो भव: के भाव से स्वागत करना चाहिए | जिला प्रशासन और सरकार द्वारा दी गई गाइडलाइन का पालन करना चाहिए | हमेशा सभी स्तर पर स्वच्छता, सफाई, सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए | खाने की क्वालिटी अच्छी होनी चाहिए साथ ही कमरों में लाइट, हवा और वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था होगी चाहिए | वार्डन को हर दिन विद्यार्थियों की उपस्तिथि, उनके स्वास्थ्य आदि की रिपोर्ट लेनी चाहिए सभी के साथ पारिवारिक रिश्ता बनाये रखना चाहिए | साल भर आने वाले सभी त्यौहार विद्यार्थियों के साथ मनाने चाहिए फन एक्टिविटी चलती रहनी चाहिए ताकि उन्हें घर की कमी महसूस न हो | सी सी टी वी कैमरे 24 घंटे चलते रहने चाहिए | फर्स्ट एड और चिकित्सा से सम्बंधित आवश्यक सभी चीजें उपलब्ध रहनी चाहिए | बाल कल्याण समिति, जिला प्रशासन और एन जी ओ को समय समय पर होस्टलों का औचक निरीक्षण करना चाहिए |www.societyhaseve.com
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