सत्याग्रह से ही विश्व का कल्याण है: डॉ. अमृता दोहन

सत्याग्रह से ही विश्व का कल्याण है: डॉ. अमृता दोहन

· गाँधी को शब्दों में बयान नहीं कर सकते : डॉ. अमृता दोहन

· सत्याग्रह का रास्ता कठिन है परन्तु अचूक है : डॉ. अमृता दोहन

सोसाइटी हैज ईव इंटरनेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर 1 सितम्बर से आयोजित की जा रही महात्मा गांधी जी की 150 वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य में ‘महात्मा गाँधी का ज्ञान’ प्रतियोगिता के अंतिम सप्ताह के विजेताओं के परिणाम कोटा की एडिशनल एस. पी. आई. पी. एस. डॉ. अमृता दोहन ने निकाले | इस मौके पर उन्होंने कहा की गाँधी का ज्ञान, उर्जा, सन्देश का महासागर है इसे हम शब्दों में बयान नहीं कर सकते | गाँधी एक सम्पूर्ण दर्शन है | गाँधी की सीख जीवन भर काम आती है | उनके द्वारा दिखाए गए सत्याग्रह के मार्ग कठिन अवश्य है परन्तु जो व्यक्ति उस मार्ग पर चल लेगा उसके लिए जीत निश्चित है | उनकी शिक्षाओं के माध्यम से जो आत्म चेतना जाग्रत होती है उससे हम अपना सर उठा कर देख सकते है और खुद को पहचान सकते है | आज की पीढ़ी जो अपना रास्ता भटक रही है उनके लिए युवाओं तक गाँधी की शिक्षाओं को पहुचाने की नितांत आवश्यकता है प्रतियोगिता के विजेताओं की जानकारी देते हुए डॉ. निधि प्रजापति ने बताया की चौथे सप्ताह के विजेता गिरिराज सुमन, छत्तीसगढ़ के अजय पटेल, जयपुर से डॉ. संपर्क आचार्य, बूंदी से रेहाना चिस्ती, विकास भारिया, कोटा से प्रीती डेनी और पूजा विजयवर्गीय रहे तथा अब तक सभी 30 विजेताओं को पुरस्कार गाँधी जयंती के दिन स्काउट एंड गाइड मुख्यालय पर दिए जायेंगे | चौथे सप्ताह में विजेताओं ने दांडी मार्च में कितने मील की दूरी तय की गई?, गांधी के मत के अनुसार सत्याग्रह के सिद्धांत के लिए क्या / आवश्यक हैं?, गांधी दक्षिण अफ्रीका क्यों गए?. गाँधी किस वर्ण से सम्बंधित थे ?, गाँधी कहाँ जा रहे थे, जब उन्हें दक्षिण अफ्रीका में ट्रेन से फेंक दिया गया था?, गांधी ने भारत में अपना पहला उपवास किस लिए शुरू किया था?, 15 अगस्त 1947 को जब भारत को आजादी मिली तो महात्मा गांधी कहां और क्यों थे? प्रश्नों के सही उत्तर दिए थे जिनका चयन लौटरी के माध्यम से किया गया |

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