कोटा | 09 मई 2022 | माँ शब्द की इस धरती पर कोई परिभाषा नहीं हो सकती है प्रेम, वात्सल्य, करुणा, ममता से भरा ये शब्द अपने आप में दुनिया का सबसे छोटा, सम्पूर्ण, और प्यारा शब्द है। असहनीय शारीरिक पीड़ा के बाद एक बच्चे को जन्म देने वाली माँ को भगवान का दर्जा दिया जाता है क्योंकि माँ जननी होती है और भगवान ने माँ के द्वारा ही पूरी सृष्टि की रचना की है। मातृत्व के इसी त्यौहार को पूरे विश्व में 8 मई को विश्व मातृ दिवस के रूप में मनाया जाता है और इसी अवसर पर सोसाइटी हैस ईव शी इंटरनेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा बहुत ही अलग अंदाज में उड़िया बस्ती में दो दिवसीय मातृ दिवस मनाया गया | इस अवसर पर डॉ. निधि ने बताया की माँ पहले तो एक बच्चे को जन्म देती है फिर अपने सारे कष्टों, शारीरिक व मानसिक पीडाओं को भूलकर जीवन भर बच्चे का पालन पोषण करती रहती है। हर बच्चे की माँ उसकी पहली गुरु होने के साथ साथ दोस्त होती है| वह बच्चे को सही राह दिखाती, सबसे अधिक प्यार दुलार करती है लेकिन जब बच्चा गलत राह पर चलने लगता है तो माँ अपने कर्तव्यों को निभाते हुए उसे किसी भी गलत संगत में पडकर अपने भविष्य को खराब करने से भी रोकती है | माँ दुनिया में भगवान का एक दूसरा रूप होती है जो हमारे सुख दुःख से लेकर जीवन के हर क्षण हमारे साथ रहती है। माँ असहनीय कष्टों को सहकर भी चुप रहती है लेकिन अगर बच्चे को जरा-सी चोट लग जाती है तो वह बहुत दुखी और परेशान हो जाती है। माँ के बिना जीवन की उम्मीद भी नहीं की जा सकती है। माँ का पूरा दिन सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक बच्चों की जरूरतें पूरा करने में ही बीत जाता है लेकिन बदले में बच्चों से कुछ भी वापस नहीं मांगती है। वह माँ वह इंसान होती है जो अपने बच्चों के लिए दुःख तकलीफ, बिमारियों में रात-रात भर पलक झपकाय जागती है। एक माँ ही बच्चे को अनुशासन का पालन करना, अच्छा व्यवहार करना और देश, समाज, परिवार के लिए हमारी जिम्मेदारी और भूमिका को समझाती है। प्रथम दिन माँ के लिए आवश्यक पोषक तत्वों पर सेमिनार आयोजित किया गया एवं दूसरे दिन जूडो कराटे की राष्ट्रीय ट्रेनर ज्योति भदोरिया के नेतृत्व में नाबार्ड के जिला समन्वयक विजय निगम, राज लक्ष्मी सिंह ने महिलाओं को बहुत सरे खेल खिलाये गए जिसमें चम्मच- अंटी दौड़, माँ की बच्चे को गोदी में लेकर दौड़ और चलते चलते सुई में धागा डालने की दौड़ कराई गई जिसमे महिलाओं ने बड चड़कर भाग लिया और पुरस्कार भी जीते | माँ-बच्चे दौड़ में गीता दुर्गा प्रथम, लक्ष्मी सुनानी द्वितीय, चित्रा चन्द्र करवार तृतीय, सुई में धागा डालने की दौड़ में इंदु प्रथम, बसंती द्वितीय, वैदही तृतीय और चम्मच- अंटी दौड़ में टिंकल प्रथम, गौरी तांडी द्वितीय, चन्द्र करवार तृतीय स्थान पर रही | खेल के बाद महिलाओं की खुशी और उत्साह का ठिकाना ही नहीं था सभी का कहना था हमें अपने माँ होने गर्व है माँ होते हुए बच्चों की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर बचपन की याद आ गई | प्रतियोगिताओं में बच्चों ने भी अपनी माताओं का खूब हौसला बढाया | उपस्थित माताओं ने कहा की हम अपने बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा-दीक्षा देना चाहते है और चाहते है की वो बड़े होकर देश का नाम रोशन करे जो हम अपने जीवन में नहीं कर सके वे हमारे बच्चे करे |


माँ-बच्चे दौड़ में गीता दुर्गा प्रथम
- माँ की बच्चे को गोदी में लेकर दौड़
- चलते चलते सुई में धागा डालने की दौड़
- माँ-बच्चे दौड़ में गीता दुर्गा प्रथम, लक्ष्मी सुनानी द्वितीय, चित्रा चन्द्र करवार तृतीय, सुई में धागा डालने की दौड़ में इंदु प्रथम, बसंती द्वितीय, वैदही तृतीय और चम्मच- अंटी दौड़ में टिंकल प्रथम, गौरी तांडी द्वितीय, चन्द्र करवार तृतीय स्थान पर रही |
- माँ-बच्चे दौड़ में गीता दुर्गा प्रथम, लक्ष्मी सुनानी द्वितीय, चित्रा चन्द्र करवार तृतीय
- सुई में धागा डालने की दौड़ में इंदु प्रथम, बसंती द्वितीय, वैदही तृतीय
- चम्मच- अंटी दौड़ में टिंकल प्रथम, गौरी तांडी द्वितीय, चन्द्र करवार तृतीय स्थान पर रही
- माँ-बच्चे दौड़ में गीता दुर्गा प्रथम







