*’माय मेंटल हेल्थ’ विषय पर देवली अरब स्कूल में सेमिनार*

*स्वास्थ्य मस्तिष्क से ही स्वास्थ्य जीवनचर्या संभव—डॉ. निधि प्रजापति*

*मानसिक स्वास्थ्य के लिए योगा- मैडिटेशन, शारिरिक श्रम और मोबाइल से दूरी जरूरी- डॉ. निधि प्रजापति*

*’माय मेंटल हेल्थ’ विषय पर देवली अरब स्कूल में सेमिनार*

*कोटा। 10 अक्टूबर 2026।* विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर कोटा के देवली अरब स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में ‘माय मेन्टल हेल्थ’ विषय पर सोसाइटी हैस ईव शी इंटरनेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार की मुख्य वक्ता साइकोलोजिस्ट डॉ. निधि प्रजापति ने बताया कि हमारा मानसिक रूप से स्वास्थ्य होना कितना जरूरी है और क्यों संयुक्त राष्ट्र ने साल 1992 में पूरे विश्व में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस को 10 अक्टूबर को मनाने का फैसला लिया। अपने उद्बोधन में डॉ. निधि ने बताया की इस वर्ष की थीम “जीने के अनुभवों को सुना गया: सच्ची आवाजें, सच्चा बदलाव” रखा गया है क्योंकि जो लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और अनुभवों को जी चुके है उसे समझ कर ही मानसिक समस्याओं को झेल रहे लोगों के जीवन में सच्चा बदलाव लाया जा सकता है और उनकी कार्यशैली को परिवर्तित करके जीवन मे सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया जा सकता है क्योंकि स्वास्थ्य मस्तिष्क से ही स्वास्थ्य जीवनशैली संभव है। साथ ही इस वर्ष की थीम इस बात पर जोर देती है कि वास्तविक बदलाव केवल बाहर से नियम बनाने से नहीं, बल्कि उन लोगों की बात सुनने से आता है जो खुद मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर चुके है। हमारे लिए यह बहुत जरूरी है कि हम अपने आप को मानसिक रूप से स्वास्थ्य रखने के लिये, अपने तनाव, चिंता और ओवर थिंकिंग को कंट्रोल करना सीखे, जिसके लिए योगा- मैडिटेशन करना, शारिरिक श्रम करना, मोबाइल से दूरी बनाना और अपने पाठ्यक्रम पर ध्यान देना बहुत जरूरी है और अगर ईश्वर में भक्ति है तो ईश्वरीय ध्यान करो। आपने आत्म विश्वास को बढ़ाए जिससे हमें अपने ऊपर किसी भी प्रकार की कोई कमी का अहसास न हो, और हम अपने आप जान पाए। अपनी तुलना किसी न करे क्योंकि यूनिवर्स में हर व्यक्ति यूनिक है । अपने संबंध अपने परिवारजन, दोस्त, और रिश्तेदारों से अच्छे रखने जरूरी है क्योंकि किसी भी परिस्थिति में हमारे पास कम से कम एक ऐसा साथी, दोस्त या संबंधी होना चाहिए जिसे हम अपने दिल की बात कह सके उसे अपनी दुःख तकलीफ बता सके। अंत में विद्यार्थियों ने अपने प्रश्न पूछे और विद्यालय प्रधानाचार्या श्रीमती लोपामुद्रा जो 24 साल पहले वक्ता की स्वयं की स्कूल समय की अध्यापिका रही ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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