शिक्षा से अच्छा कोई मित्र नहीं : डॉ. निधि

शिक्षा से अच्छा कोई मित्र नहीं : डॉ. निधि

पूर्ण मनो योग से किया गया अध्ययन ही स्थाई अध्ययन : डॉ. निधि

पढों, याद करों, स्वमूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन से करे परीक्षाओं की तैयारी: डॉ. निधि

मुख्य परीक्षा से पहले स्वयं अपनी परीक्षा ले |

उत्तर ऐसा लिखे जिसका मूल्यांकन किया जा सके |

मित्रता दिवस के उपलक्ष में स्टेशन स्थित सोनी क्लासेज पर सोसाइटी हैस ईव इंटरनेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के द्वारा अध्ययन से दोस्ती विषय पर व्याख्यान रखा गया विद्यार्थियों को बताया गया की कब, क्यों, कहाँ, कैसे और क्या पढ़ना चाहिए क्योंकि शिक्षा ही व्यक्ति को जीवन की हर समस्या का समाधान प्रदान करती है | जब कोई साथ नहीं देता तो शिक्षा ही व्यक्ति का सबसे बड़ा मित्र बनकर उसके लिए कृष्ण का काम करती है | मोटिवेशनल स्पीकर एवं मुख्य वक्ता डॉ. निधि प्रजापति ने व्याख्यान के दौरान वहाँ उपस्थित विद्यार्थियों को बताया की जीवन में सबसे अच्छा मित्र आपकी शिक्षा है इस अवसर पर जो विद्यार्थी एन. टी. एस. इ. और बोर्ड की परीक्षा देंगे उन्हें भी स्मार्ट प्लानिंग से करे स्मार्ट स्टडी करने का तरीका बताया | विद्यार्थियों को बताया की यदि परीक्षा में अच्छे अंक चाहिए तो उत्तर टू द पॉइंट लिखना चाहिए, अनावश्यक और बड़ा उत्तर देने से नंबर नही मिलते | नंबर केवल उसी उत्तर के मिलते है जो प्रश्न के अनुरूप हो और के लिए एक व्यवस्थित अध्ययन प्रक्रिया की आवश्यकता होती है जिसमें पढ़ना, याद करना, स्वयं की परीक्षा लेना, पुन: पेपर लेना और अंत में फाइनल परीक्षा देना है | पढ़ना: पढ़ने से पहले आप तय करे की सिलेबस क्या है ? अनावश्यक पढने का कोई लाभ नहीं | इसके लिए सबसे पहले मुखे बिन्दुओं को पढ़े, रटने के स्थान पर विषयवस्तु की अवधारणा समझे, उतना ही पढ़े जितने की आवश्यकता हो ? बड़ी बड़ी अवधारणाओं के शोर्ट कट बनाये , उनकी एब्रीवीएअशन बनाने से आसानी से याद रखा जा सकता है | याद करना: किसी भी चीज को याद करने के लिए सबसे पहले यह तय करे की आज पढ़े तो क्यों पढ़े और इसके पड़ने से क्या लाभ होगा | जो भी याद करनी है उसे लिखे और उसके लिए सर्वोत्तम वातावरण का चुनाव करे जहाँ किसी भी प्रकार की कोई बाधा या अनावश्यक व्यवधान न आये | साथ ही बाहरी और आन्तरिक अवरोधों को न कहना भी सीखे | समय के अनुरूप पढ़े और टाइम टेबल को फॉलो करे | अपना टेस्ट खुद लेना: याद कर लेने के बाद आप एक- दो बार अपना टेस्ट खुद ले इससे आपको अपनी कमियाँ एग्जाम से पहले ही पता लग जाएगी | अपना टेस्ट लेते वक्त पूर्ण ईमानदारी से पेपर दे | पुन: पेपर लेना: एक बार पेपर देने के बाद उस जो चीजें याद न रही हो उसे पुन: याद करके दुबारा पेपर देना चाहिए इसके लिए एक बार फिर से याद करना चाहिए | फाइनल एग्जाम देना: अपना टेस्ट खुद लेने के बाद आप जब भी फाइनल दे रहे हो निम्नलिखित बातों पर विशेष ध्यान दे की एग्जाम से पहले कुछ भी नया न पढ़े | परीक्षा देने से पहले शांत रहे, पर्याप्त नाश्ता ले और जो भी आपने याद किया है उसे मन ही मन दोहराए | एग्जाम हॉल में पानी की बोतल और एनर्जी ड्रिंक अपने साथ ले जाये | उत्तर वही दे जो की प्रश्न में पूछा गया हो, उतना ही लिखे जितने मार्क्स का प्रश्न हो | उत्तर हमेशा प्रश्न के अनुरूप हो | उत्तर ऐसा होना चाहिए जिसके आधार पर अंक प्राप्त किये जा सके, जिसे एग्जामिनर चेक कर सके | अपना पेपर हमेशा टाइम पर समाप्त करने के लिए पेपर को पड़ने के बाद उसे समयानुसार विभाजित करे | पहले वो उत्तर दे जो अच्छे से आते हो और बाद में वे प्रश्न करे जिनमें थोडा सोचने की आवश्यकता हो | अंत में विद्यार्थियों के साथ इन्द्रियों से जुड़ा खेल खेला गया जिसमें विजेता रहे विद्यार्थियों को संस्थान के निदेशक डॉ. धीरज वर्मा ने सम्मानित किया और आशिमा रस्तोगी व पारुल वर्मा से धन्यवाद ज्ञापित किया |

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