<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Society &#8211; GLOBAL VILLAGE</title>
	<atom:link href="https://societyhaseve.com/tag/society/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://societyhaseve.com</link>
	<description>SHE-Society Has Eve:</description>
	<lastBuildDate>Tue, 01 Jun 2021 20:49:14 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	

<image>
	<url>https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2018/04/cropped-Society-Has-Eve-SHE-1.png?fit=32%2C32&#038;ssl=1</url>
	<title>Society &#8211; GLOBAL VILLAGE</title>
	<link>https://societyhaseve.com</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
<site xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">95391325</site>	<item>
		<title>माहवारी होना पाप नहीं, पुण्य है।</title>
		<link>https://societyhaseve.com/article-by-dr-payal-upadhayay-article-on-menses-are-boon-not-curse/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Admin SHE]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Jun 2021 13:34:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[Article By Dr Payal Upadhayay]]></category>
		<category><![CDATA[Article on Menstrual Hygiene]]></category>
		<category><![CDATA[Customs]]></category>
		<category><![CDATA[Masik Dharm]]></category>
		<category><![CDATA[Menses are boon not curse]]></category>
		<category><![CDATA[Menstrual Cups]]></category>
		<category><![CDATA[Menstrual Hygiene]]></category>
		<category><![CDATA[MHM]]></category>
		<category><![CDATA[Rituals]]></category>
		<category><![CDATA[Sanitary Napkins]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Article]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Blogs]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Letter]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Media]]></category>
		<category><![CDATA[Society]]></category>
		<category><![CDATA[Tampons]]></category>
		<category><![CDATA[Women Talks]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://societyhaseve.com/?p=4864</guid>

					<description><![CDATA[माहवारी ! सामाजिक कुप्रथा ! एक मिथ्या! या एक लड़की के लड़की से औरत बनने का सफर ! या एक अभिश्राप या एक वरदान क्या है? सब कुछ है और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>माहवारी ! सामाजिक कुप्रथा ! एक मिथ्या! या एक लड़की के लड़की से औरत बनने का सफर ! या एक अभिश्राप या एक वरदान क्या है? सब कुछ है और कुछ भी नहीं। एक औरत का दर्द है। एक लड़की जो कोमल कली होती है उसके लिए यह महावारी एक पहेली की तरह होती हैं जो उसको अलग-अलग तरह से समझाया जाता | पर सच तो ये है कि ये माहवारी ना हो तो भी इन लड़को का जीवन बहुत कठिन है। समाज उसे इस रूप में भी स्वीकार नहीं करता है। इसलिए यह एक खूबसूरत एहसास है ना कि अभिषाय, ये तो वो पुण्य है जिससे एक औरत सृष्टि को जन्म देती है। मासिक धर्म यानि माहवारी एक औरत के जीवन चर्या का अभिन्न अंग है। इस विषय पर खुल कर बात करना जरूरी है ताकि यह विषय दुनिया के लिए अस्पृश्य न रह कर सामान्य ज्ञान की श्रेणी में आ सकें।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><span style="color: #0000ff;"><strong><a style="color: #0000ff;" href="https://societyhaseve.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%94">महिला सम्मान, सशक्तिकरण और व्यक्तिगत स्वच्छता पर कार्यक्रम</a></strong></span></p>
<p>माहवारी पर जब तक हम खुल कर चर्चा नहीं करेंगे तब तक यह समाज के लिए एक अस्पृश्य विषय बन कर रह जाएगा। और इसके लिए सबसे पहले हमे लैंगिक भेद मिटावा बहुत जरुरी है |<br />
माहवारी के दिनों में तीन चीज अहम होती है जागरुकता, उपलब्धता और वहन करने की क्षमता । यानि संबंधित उत्पाद हर हाल में जरूरत मंद किशोरी, युवती और महिला को मिलने की सुनिश्चितता हो क्योंकि आज भी दूर दराज के इलाकों में महिलाएं इन दिनों के लिए काम आने वाले बैंड व कपड़े तक से वंचित है।<br />
माहवारी कोई समस्या या बीमारी नहीं है। यह एक शारीरिक क्रिया है जिसके न होने से सृष्टि का निर्माण रुक जाएगा एक औरत का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। एक औरत को पूर्ण औरत बनाती है ये माहवारी&#8221;! यह होना पाप नहीं है पुण्य है। और हमें हमारे समाज को जागरूकता लानी होगी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE:</strong> </span><strong><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://societyhaseve.com/article-by-dr-nidhi-prajapati-on-menstrual-hygiene-day-%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%87">कुछ दाग सृष्टि के चलायमान रहने के लिए अच्छे है</a></span></strong></p>
<p>पुरुष इसमें महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है लिंग भेद सबसे पहले समाप्त होना बहुत जरुरी है। जब भी हम टेलीविजन देखते है और जब सेनेटरी नैपकिन का कोई विज्ञापन आता है तो तुरनत हम चैनल बदल देते है। ऐसा क्यों? देखो उस विज्ञापन को और समझाओ बच्चों को यह क्या होता है। जब सेनेटरी नैपकिन लेने बाजार जाते हैं तो दुकानदार से बड़ा शर्माते हुए बोलते हैं या दुकान खाली होने का इन्तजार करते हैं जब कोई नहीं होगा तक मांगेंगे लेकिन इस बात पर शर्म क्यो? खुलकर इस विषय पर बोलो, चर्चा करो समझों और जो भी मिथ्या है दूर करो |<br />
अचार खराब नहीं होता, मंदिर में दीया लगाने से या मंदिर जाने से मंदिर दूषित नहीं होता, बर्तन में खाना बनाना से खाने से बर्तन खराब नहीं होता यह सब मिथ्या है। माहवारी सिर्फ महिलाओं से जुड़ा मुद्दा नहीं है और ये भी मानना गलत है कि इसका सरोकार सिर्फ महिलाओं से है। यह एक मानवीय मुद्दा है जिसमें सबकी भागीदारी महत्वपूर्ण है। यह रिवाज महिलाओं को आराम देने के उद्देश्य से बनाया गया था क्योंकि इन दिनों में वो दर्द से गुजर रही होती है। ये माहवारी एक चार दिन की प्रक्रिया है जब हमारे शरीर से वो रक्त बाहर आता जो हर महीने एक अजन्मे बच्चे को माँ के गर्भाशय में सुरक्षा प्रदान करने के लिए एकर्त्रित हुआ परन्तु अंडे के निषेचित न होने के कारण काम में नहीं आया | इसलिए मासिक धर्म का होना अत्यन्त आवश्यक होता है। &#8216;भारत में आज भी कई ऐसी जगह है जहाँ पर जब एक लड़की जवानी की देहलीज पर कदम रखती है तो उसको एक त्यौहार की तरह मनाया जाता है। उसके लिए तोहफे लाए जाते हैं। उसको माहवारी क़ो त्यौहार की तरह मनाते है | जबकि यह तो एक महत्वपूर्ण पहलू है जिसमें पानी, स्वच्छता एवं साफ सफाई तीनों का अत्यन्त ध्यान रखना आवश्यक है।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><strong><span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff;" href="https://societyhaseve.com/article-by-shobha-kanwar-on-menstruation-hygiene-and-awareness">“कुछ दाग अच्छे हैं”</a></span></strong></p>
<p>हाल ही यूं के के मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में किए गए एक अध्ययन में खुलासा हुआ है कि अगर भारत में माहवारी उत्पादों के उपयुक्त निपटारे पर ध्यान दिया गया तो अगले पचास साल से भी कम अवधि में भारत में ऐसे कचरे के बोझ की समस्या से गंभीर रूप से दो चार होना पड़ेगा | अगर हमने वक्त पर इसको गंभीरता को नहीं समझा और इस महामारी में माहवारी से जुड़े मुद्दों और इनके समाधान के प्रयास नहीं किए तो समस्याएँ बढ़ेगी हो भले ही आधी आबादी बादकिस्मती से &#8220;शर्म और &#8216;साइलेंस&#8221; यानि &#8220;शर्म और चुप्पी&#8221; वाले इस विषय पर बात न करें। देखा जाए तो यह माहवारी एक औरत का गहना है, जिससे उसे मातृत्व सुख की प्राप्ति होती है। भगवान खुद पूरी सृष्टि की संरचना स्वयं नहीं कर सकते थे  इसलिए उन्होंने नारी की संरचना की और यदि किसी लड़की को मासिक धर्म नियमित रूप से नहीं आते हैं तो वो प्राकृतिक रूप से कभी माँ बनने का सौभाग्य प्राप्त नहीं कर सकती है।</p>
<p><a href="https://www.facebook.com/payalkuhu"><span style="color: #0000ff;"><strong>डॉ. पायल उपाध्याय</strong></span></a><br />
<span style="color: #0000ff;"><strong>प्रोफेसर बिज़नस एडमिनिस्ट्रेशन</strong></span><br />
<a href="https://www.facebook.com/Womenwelfareofworld"><span style="color: #0000ff;"><strong>सचिव: वीमेन वेलफेयर आर्गेनाइजेशन ऑफ वर्ल्ड</strong></span></a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">4864</post-id>	</item>
		<item>
		<title>&#8220;कुछ दाग अच्छे हैं&#8221;</title>
		<link>https://societyhaseve.com/article-by-shobha-kanwar-on-menstruation-hygiene-and-awareness/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Admin SHE]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 01 Jun 2021 13:04:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[Article By Shobha Kanwar]]></category>
		<category><![CDATA[Article on Menstrual Hygiene Day]]></category>
		<category><![CDATA[Customs]]></category>
		<category><![CDATA[Masik Dharm]]></category>
		<category><![CDATA[Menstrual Cups]]></category>
		<category><![CDATA[Menstrual Hygiene]]></category>
		<category><![CDATA[MHM]]></category>
		<category><![CDATA[Rituals]]></category>
		<category><![CDATA[Sanitary Napkins]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Article]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Blogs]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Letter]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Media]]></category>
		<category><![CDATA[Society]]></category>
		<category><![CDATA[Tampons]]></category>
		<category><![CDATA[Women Talks]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://societyhaseve.com/?p=4854</guid>

					<description><![CDATA[&#8220;कुछ दाग अच्छे हैं&#8221; माहवारी, रजोदर्शन, रजोधर्म, मासिक धर्म या पीरियड नाम सुनते ही आज भी लड़कियां खामोश हो जाती हैं। वे खुलकर बात नही कर पाती ,क्योंकि जिस दिन [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong><span style="color: #ff0000;">&#8220;कुछ दाग अच्छे हैं&#8221;</span></strong><br />
माहवारी, रजोदर्शन, रजोधर्म, मासिक धर्म या पीरियड नाम सुनते ही आज भी लड़कियां खामोश हो जाती हैं। वे खुलकर बात नही कर पाती ,क्योंकि जिस दिन से मासिक धर्म की शुरुआत होती है उसी दिन से उसे सिखाया जाता है तुम बीमार हो, अशुद्ध हो, पूजा घर मे मत जाना, इसके हाथ मत लगाना, उसे मत छूना, ये करना, ये मत करना। वो बेचारी इसी पशोपेश में पड़ जाती है कि क्या मुझसे कोई गुनाह हो गया है? आज हम भले ही वैज्ञानिक युग मे जी रहें हैं, लेकिन मासिक धर्म के प्रति दृष्टिकोण में अभी कोई ज्यादा अंतर नही आ पाया। शहरों में एकल परिवार की वजह से खाना तो बना लेती हैं महिलाएं पर पूजा पाठ, मंदिर, व्रत आदि से परहेज किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात और भी बदतर हैं । अभी कल ही एक बालिका मेरे पास आई मेम घर जाना है। मेरी तबियत ठीक नही। मेरे कपड़ों पर दाग भी लग गया बहुत शर्म आ रही है। इसमे शर्म जैसी कोई बात नही, &#8221; ये दाग अच्छे हैं&#8221; ये तुम्हारी सृजन शक्ति का प्रतीक हैं। इसी मे तुम्हारे नारीत्व की सम्पूर्णता है। ये शर्म की नही गर्व की बात है। मासिक धर्म शुरू होने से पहले ही यदि एक बालिका को इस दौरान बरती जाने वाली स्वच्छता एवं सावधानियों के बारे में जानकारी दे दी जाए तो बालिकाएं इस पर खुलकर बात कर सकेंगी।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: </strong></span><a href="https://societyhaseve.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a3-%e0%a4%94"><span style="color: #0000ff;"><strong>महिला सम्मान, सशक्तिकरण और व्यक्तिगत स्वच्छता पर कार्यक्रम</strong></span></a></p>
<p>क्या करें?<br />
<span style="color: #993366;"><strong>&#8220;एक माँ&#8221;</strong></span><br />
1 बेटी को समझाए कि ये एक जैविक प्रक्रिया है। प्रत्येक स्त्री को इस दौर से गुजरना पड़ता है।<br />
2 12 से 14 साल तक की प्रत्येक बालिका को माहवारी आ जानी चाहिए। यदि ऐसा न हो तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।<br />
3  अमूमन माहवारी का चक्र 22 से 28 दिन या कभी कभी 30 से 32 दिन भी होता है और 4 से 5 दिन तक स्राव स्वतः ही रुक जाता है। इसका अनियमित होना भी परेशानी का सबब है।<br />
4 अपनी बच्ची को आम दिनों की तरह ही सभी कार्य करने दे, विद्यालय जाने से भी न रोकें।<br />
5 सम्पूर्ण पौष्टिक आहार व आराम करने का मौका दे।<br />
6 दुसरो के सामने उसे माहवारी को लेकर हीन भावना न महसूस करवाएं।<br />
7 सैनेटरी पेड का ही उपयोग व निस्तारण भी सिखाएं कि न तो कोई जानवर खा पाये और न ही पर्यावरण प्रदूषित हो।</p>
<p><span style="color: #ff0000;"><strong>READ MORE: <span style="color: #0000ff;"><a style="color: #0000ff; text-decoration: underline;" href="https://societyhaseve.com/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%81-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a7%e0%a4%b0%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%ae">माँ के समान ही धरती का सम्मान करे : डॉ. विजय सरदाना</a></span></strong></span></p>
<p><span style="color: #993366;"><strong>&#8220;एक शिक्षिका&#8221;</strong></span> एक शिक्षिका को चाहिए कि उसे अच्छी  तरह से काउंसिल करे उसे बताये&#8230;<br />
1  एक महिला को तकरीबन अपने सम्पूर्ण जीवन मे 450 बार या 37 से 38 साल मासिक धर्म होता है।<br />
2  यदि इस दौरान कमर दर्द, पेड़ू दर्द, पेट दर्द हो तो गर्म पानी की सिकाई आराम देती है, इन 5 दिनों में नहाना भी गर्म पानी से चाहिए।<br />
3  हमारे गर्भाश्य की पुरानी ऊतकों तथा योनि के स्राव और रक्त के इस मिश्रण से ही एक मानव शरीर का निर्माण होता है। जब ये काम नही आता तो शरीर इसे बाहर निकाल देता है। ये प्रक्रिया चलती रहती है। जिस तरह से हमारे शरीर से पसीना निकलता है वैसे ही ये भी।<br />
4 इन दिनों में पूजा पाठ करने से, व्रत से ईश्वर नाराज नही होते, अशुद्ध भी नही होते क्योकि वे तो सर्वोपरि है। और उसी रक्त से जब हमारा शरीर भी बना है।<br />
5 विद्यालय में इंसीनरेटर/ डिस्पेंसर मशीन का उपयोग करना सिखाये।<br />
6 हर महीने एक कार्यशाला का आयोजन कर बलिकाओं को जागरूक करती रहें।</p>
<p><span style="color: #993366;"><strong>&#8220;एक बालिका&#8221;</strong></span></p>
<p>1  बालिका को चाहिए कि वो माहवारी में आने वाली हर परेशानी को घर पर अपनी माता या बहन से साझा करें, विद्यालय में शिक्षिका से। माहवारी की अनियमितता उनकी प्रजनन शक्ति पर प्रभाव डाल सकती है।<br />
2  नियमित योगा व व्यायाम करती रहें।<br />
3 आम दिनों की तरह कार्य करें, रूढ़िवादी परंपराओं से परिवार व पास &#8211; पड़ौस को जागरूक करें।<br />
4 प्रसन्न रहें।<br />
5 विद्यालय आना न छोड़ें।<br />
6 महावारी से शर्म नही, बल्कि महावारी का उत्सव मनाएं।<br />
&#8220;आओ माहवारीका उत्सव मनाएं&#8221; जिस से नारी सम्पूर्ण कहलाये। तो हर दाग बुरा नही होता। ये दाग हमारे सम्मान का प्रतीक है।&#8221; नारीत्व की सम्पूर्णता का प्रतीक मासिक धर्म ही है। इसलिए हमें इस पर शर्म नही गर्व करना चाहिए।</p>
<p><a href="https://www.facebook.com/shobha.kanwar.1"><strong><span style="color: #ff0000;">शोभा कँवर</span></strong></a><br />
<a href="https://www.facebook.com/Womenwelfareofworld"><span style="color: #0000ff;"><strong>बालिका गरिमा पुरस्कार से सम्मानित </strong></span></a><br />
<span style="color: #0000ff;"><strong>अध्यापिका-राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बरुन्धन, बून्दी, राजस्थान</strong></span></p>
<pre></pre>
]]></content:encoded>
					
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">4854</post-id>	</item>
		<item>
		<title>शी&#8230;..कोई सुन ना ले</title>
		<link>https://societyhaseve.com/article-by-dr-nidhi-prajapati-on-menstrual-hygiene-day-%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%87/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Admin SHE]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 28 May 2021 09:23:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Article]]></category>
		<category><![CDATA[Nidhi Prajapati]]></category>
		<category><![CDATA[28 May]]></category>
		<category><![CDATA[Article by Dr Nidhi Prajapati]]></category>
		<category><![CDATA[Article on Menstrual Hygiene Day]]></category>
		<category><![CDATA[Assam]]></category>
		<category><![CDATA[Kamakhya Devi]]></category>
		<category><![CDATA[Kamakhya Devi Temple]]></category>
		<category><![CDATA[Masik Dharm]]></category>
		<category><![CDATA[Menstrual Cups]]></category>
		<category><![CDATA[Menstrual Hygiene]]></category>
		<category><![CDATA[MHM]]></category>
		<category><![CDATA[Sanitary Napkins]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Article]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Blogs]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Letter]]></category>
		<category><![CDATA[SHE Media]]></category>
		<category><![CDATA[Society]]></category>
		<category><![CDATA[Tampons]]></category>
		<category><![CDATA[डॉ. निधि प्रजापति]]></category>
		<category><![CDATA[मासिक धर्म]]></category>
		<category><![CDATA[मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://societyhaseve.com/?p=4826</guid>

					<description><![CDATA[कुछ दाग सृष्टि के चलायमान रहने के लिए अच्छे है शी&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;कोई सुन लेगा ऐसी बातें सबके सामने नहीं करते &#124; चुप-चाप जो में बता रही हूँ वैसे कर लेना और [&#8230;]]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 style="text-align: center;">कुछ दाग सृष्टि के चलायमान रहने के लिए अच्छे है</h1>
<p>शी&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;&#8230;कोई सुन लेगा ऐसी बातें सबके सामने नहीं करते | चुप-चाप जो में बता रही हूँ वैसे कर लेना और किसी को बताना नहीं, न पूजा घर में जाना, न पूजा करना, न भगवान को हाथ लगाना न मटकी को, न पापड़ आचार को छूना और अगर ठीक न लग रहा हो तो स्कूल मत जाना, अब तू बड़ी हो गई है इसलिए बाहर खेलना बंद और भी न जाने कौन-कौन सी बातें जुडी है मासिक धर्म से जिसे आम भाषा में पीरियड्स, रजस्वला भी कहा जाता है | ये सब कुछ भेदभाव, धर्म, रीति-रिवाज, परम्परा के नाम पर उस महिला के साथ होता है जो खुद देवी का स्वरुप कहलाती है और विडंबना देखिये उसी देवी की पूजा करने के लिए समाज में प्रत्यक्ष रूप से जीती-जागती महिलाओं न बच्चियों को मना कर दिया है | जबकि मासिक धर्म से जुड़े अंधविश्वासों का कोई तर्क नहीं है | मासिक धर्म से सम्बंधित अनगिनत मिथ्यों को तोड़ने, समाप्त करने और मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन के महत्व के विषय में जाग्रति उत्पन्न करने के उद्देश्य से आज मासिक धर्म स्वच्छता दिवस मनाया जाता है और इसके लिए 28 मई का दिन ही प्रतीकात्मक रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि मई साल का 5 वा माह होता है और साधारणतया महिलाओं को मासिक धर्म 5 दिनों के लिए होता है जिसका मासिक चक्र 28 दिन का रहता है | इस मासिक धर्म स्वच्छता दिवस की शुरुआत 2014 में जर्मनी के एन जी ओ वाश यूनाइटेड के द्वारा की गई थी | इस दिन आम तौर पर समाज में व्याप्त माहवारी से सम्बंधित अंधविश्वास, भ्रांतियाँ, रूढिया आदि को दूर करने की शपथ ली जाती है क्योंकि आज भी हमारे समाज में मासिक धर्म को लेकर अनेकों अनेक भ्रांतियाँ फैली हुई जिसके कारण महिलाओं को असंख्य घटक समस्याओं और जानलेवा बिमारियों का सामना करना पड़ता है |</p>
<p>देखा जाये तो यह माहवारी ही महिला के जीवन का वह सबसे मूल्यवान गहना है जो उसे सृष्टि का सर्वोत्तम सुख, मातृत्व प्रदान करता है | स्वास्थ्य मासिक धर्म के आधार पर ही कोई भी महिला माँ बन सकती है इसलिए इसे ईश्वर का वरदान समझना चाहिए न की कोई बीमारी या अभिश्राप | भगवान क्योंकि सम्पूर्ण सृष्टि की संरचना स्वयं नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने नारी की संरचना की और यदि किसी लड़की को स्वस्थ्य मासिक धर्मं नियमित रूप से न आते हो तो वह लड़की कभी प्राकृतिक रूप से माँ भी नहीं बन सकती | पृथ्वी पर सबसे बड़ा दान रक्तदान माना जाता है क्योंकि वो किसी इंसान की जान बचा सकता है और ईश्वर ने महिलाओं को हर माह रक्तदान करने कि शक्ति इंसान को जन्म देने के लिए प्रदान की है | इसीलिए मासिक धर्म को कोई बीमारी न समझे या उसे बुरी दृष्टि से न देखे | मासिक धर्म को सम्मान की दृष्टि से देखा जाये न की श्राप की दृष्टि से | महिला, परिवार और समाज के सभी सदस्यों को यह समझना चाहिए की मानव की उत्पत्ति माहवारी के बिना संभव ही नहीं है | अतः माहवारी या मासिक धर्म गर्व की बात है ना कि शर्म, हीनता, तनाव, कुंठा आदि की |</p>
<div id="attachment_4833" style="width: 730px" class="wp-caption aligncenter"><a href="https://societyhaseve.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9"><img data-recalc-dims="1" fetchpriority="high" decoding="async" aria-describedby="caption-attachment-4833" data-attachment-id="4833" data-permalink="https://societyhaseve.com/article-by-dr-nidhi-prajapati-on-menstrual-hygiene-day-%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%87/175453766_112070440994489_948091324588535391_n/#main" data-orig-file="https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2021/05/175453766_112070440994489_948091324588535391_n.jpg?fit=720%2C965&amp;ssl=1" data-orig-size="720,965" data-comments-opened="0" data-image-title="दिव्य’ माहवारी" data-image-description="&lt;p&gt;देवी की ‘दिव्य’ माहवारी, हमारे लिए ‘बीमारी’&lt;/p&gt;
" data-image-caption="&lt;p&gt;देवी की ‘दिव्य’ माहवारी, हमारे लिए ‘बीमारी’&lt;/p&gt;
" data-large-file="https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2021/05/175453766_112070440994489_948091324588535391_n.jpg?fit=640%2C858&amp;ssl=1" class="wp-image-4833 size-full" src="https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2021/05/175453766_112070440994489_948091324588535391_n.jpg?resize=640%2C858&#038;ssl=1" alt="दिव्य’ माहवारी" width="640" height="858" srcset="https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2021/05/175453766_112070440994489_948091324588535391_n.jpg?w=720&amp;ssl=1 720w, https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2021/05/175453766_112070440994489_948091324588535391_n.jpg?resize=224%2C300&amp;ssl=1 224w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></a><p id="caption-attachment-4833" class="wp-caption-text"><a href="https://societyhaseve.com/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b9">  देवी की ‘दिव्य’ माहवारी, हमारे लिए ‘बीमारी’</a></p></div>
<p>महिला के पूरे जीवन के स्वस्थ्य शरीर की बनावट के लिए माहवारी का नियमित होना जरुरी है जिसके लिए नियमित व्यायाम करना आवश्यक है | समाज के लोगों को यह समझना होगा चाहे वह महिला हो या पुरुष की हर दाग बुरा नहीं होता हमारे जीवन में कुछ निशान और दाग ऐसे भी होते है जो सृजन की शक्ति रखते गई और उनमे से ही एक है माहवारी का निशान | मासिक धर्म को समाज द्वारा बुरा समझ कर महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है उन पर विभिन्न प्रकार की पारिवारिक, धार्मिक और सामाजिक बाध्यता लगा दी जाती है जबकि असम में माँ कामाख्यां देवी का मंदिर है जहाँ माता की पूजा मासिक धर्म आने की विशेषता के कारण ही होती है | उनके रक्तवर्णी वस्त्र को पुजारियों द्वारा प्रसाद के रूप में श्रद्धालु-भक्तों में विशेष रूप से वितरित किया जाता है जिसे वे अपने घरों कारोबार में पूजा स्थल पर रखते है लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए देश विदेश से आते है तो जब मासिक धर्म के समय मंदिर में विराजित माँ कामाख्या पवित्र हो सकती है तो हमारे आपके घरों विद्यमान आम महिलायें कैसे अपवित्र या अशुद्ध हो जाती है | जब हम उन दिनों पानी, प्रकाश, धरती, हवा, शिक्षा, के साथ कोई भेद भाव नहीं करते तो धार्मिक कार्यों से परहेज क्यों करे? जब असम की कामाख्या माता को पूजा जा सकता है तो हम क्यों समाज में फैले अतार्किक और व्यर्थ के रीति-रिवाजों का पालन करे | जबकि इस समय में खान- पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए खाना ऐसा होना चाहिए जिसमें आयरन और प्रोटीन की मात्रा अच्छी और गर्म पानी का सेवन करना चाहिए | भोजन में प्रचुर मात्रा में हरी सब्जियाँ, सलाद और फल खाने चाहिए |</p>
<p><img data-recalc-dims="1" decoding="async" data-attachment-id="4827" data-permalink="https://societyhaseve.com/article-by-dr-nidhi-prajapati-on-menstrual-hygiene-day-%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%87/she-article-%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%88-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%a8-%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%87/#main" data-orig-file="https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2021/05/she-article-%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A5%87.jpg?fit=650%2C540&amp;ssl=1" data-orig-size="650,540" data-comments-opened="0" data-image-title="she-article-शी-कोई-सुन-ना-ले" data-image-description="" data-image-caption="" data-large-file="https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2021/05/she-article-%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A5%87.jpg?fit=640%2C532&amp;ssl=1" class="aligncenter wp-image-4827 size-medium" src="https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2021/05/she-article-%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A5%87.jpg?resize=300%2C249&#038;ssl=1" alt="" width="300" height="249" srcset="https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2021/05/she-article-%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A5%87.jpg?resize=300%2C249&amp;ssl=1 300w, https://i0.wp.com/societyhaseve.com/wp-content/uploads/2021/05/she-article-%E0%A4%B6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%88-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8-%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A5%87.jpg?w=650&amp;ssl=1 650w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p>भारत की बात करे तो देश में 355 मिलियन मासिक धर्म वाली महिलाओं की संख्या है, जो देश की आबादी का लगभग 30 प्रतिशत है जिनमें से 70 प्रतिशत माताओं ने मासिक धर्म को गंदा माना और 71 प्रतिशत किशोरियों को मासिक धर्म से पहले मासिक धर्म की जानकारी नहीं थी। 2014 की यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि तमिलनाडु में 79 प्रतिशत लड़कियां और महिलाएं मासिक धर्म स्वच्छता प्रथाओं से अनजान थीं। यह प्रतिशत उत्तर प्रदेश में 66 प्रतिशत, राजस्थान में 56 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 51 प्रतिशत था। इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च की 2011-12 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में केवल 38 प्रतिशत मासिक धर्म वाली लड़कियों ने अपनी माताओं से मासिक धर्म के बारे में बात की। यहाँ तक की माताएँ स्वयं इस बात से अनजान थीं कि मासिक धर्म होता क्या है? स्कूल भी बहुत मददगार नहीं थे क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल मासिक धर्म स्वच्छता पर चर्चा करने से बचते थे। शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2015 के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि गांवों के 63% स्कूलों में शिक्षकों ने मासिक धर्म और इससे कैसे निपटा जाए, इस पर कभी चर्चा नहीं की। ऐसे में एक किशोरी को यह कैसे समझाया जाए की मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन कैसे किया जाये ।</p>
<p>मासिक धर्म के कारण ही बच्चियों कि शिक्षा रुक जाती है और कभी कभी वे परिवार वालों की सोच के कारण परीक्षाओं से भी वांछित हो जाती है | बहुत सारी बालिकाएं केवल इसी कारण से अपनी पढाई छोड़ देती है क्योंकि विद्यालय में शोचालय नहीं होते | 2014 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 23 मिलियन लड़कियां मासिक धर्म शुरू होने पर जल्दी स्कूल छोड़ देती हैं और उनमें से कई को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है क्योंकि<strong> </strong>उनके पास सेनेटरी नैपकिन खरीदने के पैसे नहीं होते, विद्यालयों के शौचालय अत्यधिक गंदे रहते है, वे ऐसे गंदे कपड़े का प्रयोग करती हैं जो स्वच्छ व संक्रमणरहित नहीं होता जिसकी वजह से वैजाइनल फंगल इनफैक्शन, सर्विकस कैंसर, यूट्रेस कैंसर होने की संभावना रहती है | 2011 की ए. सी. नेल्सन की रिपोर्ट के अनुसार केवल 12% भारतीय महिलाएं सेनेटरी नैपकिनका प्रयोग करती है  जिसका प्रतिशत हालाँकि अब कुछ हद तक सुधर गया है किन्तु अभी भी हमें मासिक धर्म से सम्बंधित आडम्बरों , रीति रिवाजों को दूर करने के लिए एक सर्वव्यापी सशक्त मुहीम चलाने की आवश्यकता है |</p>
<p>मासिक धर्मं से जुड़ी वर्जनाओं,अन्धविश्वासों, भ्रांतियों पर आधारित है कई फिल्मों जैसे अरुणाचलम मुरुगानान्थम के चरित्र पर निर्मित पैडमैन, पीरियड एंड ऑफ सेंटेंस के माध्यम से समाज में जागृति लाने का प्रयास किया जा रहा है | स्कूल कॉलेज यूनिवर्सिटी में इस विषय पर संगोष्ठी, सेमिनार, कांफ्रेंस आयोजित की जाने लगी है | लोगों, महिलाओं और बच्चियों को यह समझाया जा रहा है की यह महिलाओं के जीवन से सम्बंधित यह एक जैविक विकास की प्रक्रिया है जिसमें किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है |</p>
<p><a href="https://www.facebook.com/me.nidhi.kota/"><strong>Dr. Nidhi Prajapati</strong></a><br />
<a href="https://societyhaseve.com/"><strong>President-Society Has Eve-SHE International Charitable Trust</strong></a></p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
		<post-id xmlns="com-wordpress:feed-additions:1">4826</post-id>	</item>
	</channel>
</rss>
